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भारत सरकार ने 5G Network Slicing को ध्यान में रखते हुए Net Neutrality नियमों की समीक्षा शुरू की है। जानिए इसका Airtel, Jio, Vodafone Idea और आम मोबाइल यूजर्स पर क्या असर पड़ सकता है।

भारत में 5G तकनीक तेजी से फैल रही है और इसके साथ ही इंटरनेट के इस्तेमाल से जुड़े नियमों में भी बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) से कहा है कि वह वर्ष 2018 में बनाए गए Net Neutrality नियमों की समीक्षा करे, ताकि उन्हें 5G Network Slicing जैसी नई तकनीकों के अनुरूप बनाया जा सके।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब देश में पहली बार 5G Network Slicing पर आधारित व्यावसायिक सेवा लॉन्च की गई है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह फैसला पूरे भारतीय टेलीकॉम सेक्टर की दिशा तय कर सकता है।

आखिर क्या है पूरा मामला?

सरकार की यह समीक्षा Bharti Airtel द्वारा 19 मई 2026 को शुरू की गई Priority Postpaid सेवा के बाद शुरू हुई। इस सेवा के तहत Airtel ने अपने लगभग 2.9 करोड़ पोस्टपेड ग्राहकों को एक विशेष 5G नेटवर्क लेन उपलब्ध कराई है। इसका उद्देश्य भीड़भाड़ वाले समय में भी ग्राहकों को अधिक स्थिर और बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी देना है। यह भारत में पहली उपभोक्ता सेवा मानी जा रही है, जिसमें 5G Network Slicing तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

क्या होता है 5G Network Slicing?

5G Network Slicing ऐसी तकनीक है, जिसमें एक ही 5G नेटवर्क को कई अलग-अलग वर्चुअल नेटवर्क में बांटा जा सकता है। उदाहरण के लिए—

  • एक हिस्सा अस्पतालों के लिए
  • दूसरा उद्योगों के लिए
  • तीसरा गेमिंग या वीडियो स्ट्रीमिंग के लिए
  • चौथा सामान्य मोबाइल यूजर्स के लिए

हर वर्चुअल नेटवर्क को उसकी जरूरत के अनुसार अलग गुणवत्ता और प्रदर्शन दिया जा सकता है। इससे नेटवर्क का बेहतर उपयोग होता है और अलग-अलग सेवाओं को उनकी आवश्यकता के अनुसार स्थिर कनेक्टिविटी मिलती है।

Net Neutrality क्या है?

Net Neutrality का मतलब है कि इंटरनेट पर मौजूद हर वेबसाइट, ऐप और ऑनलाइन सेवा के साथ समान व्यवहार किया जाए। कोई भी टेलीकॉम कंपनी किसी विशेष ऐप, वेबसाइट या प्लेटफॉर्म को तेज या धीमा इंटरनेट नहीं दे सकती और न ही किसी सेवा को अतिरिक्त प्राथमिकता दे सकती है। इसी सिद्धांत के आधार पर भारत ने वर्ष 2018 में अपने Net Neutrality नियम लागू किए थे।

TRAI ने क्या कहा?

प्रारंभिक जांच में TRAI को ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि Airtel की Priority Postpaid सेवा मौजूदा Net Neutrality नियमों का उल्लंघन कर रही है। कारण यह है कि यह सेवा किसी विशेष ऐप, वेबसाइट या कंटेंट को प्राथमिकता नहीं देती, बल्कि पूरे इंटरनेट कनेक्शन की गुणवत्ता बेहतर बनाने का दावा करती है। हालांकि TRAI ने अभी अंतिम मंजूरी नहीं दी है। रेगुलेटर ने Airtel से अतिरिक्त तकनीकी जानकारी और सेवा गुणवत्ता से जुड़े आंकड़े मांगे हैं, ताकि विस्तृत मूल्यांकन किया जा सके।

सरकार नियमों में बदलाव क्यों चाहती है?

जब भारत में Net Neutrality के नियम बनाए गए थे, तब देश में Standalone 5G नेटवर्क उपलब्ध नहीं था। अब 5G तकनीक कई नई सुविधाएं लेकर आई है, जिनके लिए पुराने नियम पर्याप्त नहीं माने जा रहे हैं। सरकार चाहती है कि नए नियम तकनीकी विकास को भी बढ़ावा दें और साथ ही इंटरनेट की निष्पक्षता भी बनी रहे।

Jio और Vodafone Idea की क्या राय है?

इस मुद्दे पर देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियों की राय अलग-अलग है। Reliance Jio का कहना है कि Network Slicing अंतरराष्ट्रीय 3GPP मानकों के अनुरूप है और यह Net Neutrality के साथ भी काम कर सकती है। वहीं Vodafone Idea ने अधिक सतर्क रुख अपनाया है। कंपनी का कहना है कि जब तक TRAI और दूरसंचार विभाग स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं करते, तब तक ऐसे Priority Plans को रोककर रखा जाना चाहिए।

संसदीय समिति ने भी मांगा जवाब

इस मामले पर संसद की स्थायी समिति भी नजर बनाए हुए है। समिति ने दूरसंचार विभाग और TRAI से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या Priority Postpaid जैसी सेवाओं से प्रीपेड ग्राहकों की इंटरनेट गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। भारत में अधिकांश मोबाइल उपभोक्ता प्रीपेड सेवा का उपयोग करते हैं, इसलिए यह सवाल काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आम मोबाइल यूजर पर क्या असर होगा?

यदि सरकार नए नियम लागू करती है, तो भविष्य में मोबाइल कंपनियां अलग-अलग गुणवत्ता वाली इंटरनेट सेवाएं पेश कर सकती हैं। उदाहरण के लिए—

  • बेहतर वीडियो कॉलिंग के लिए प्रीमियम प्लान
  • गेमिंग के लिए कम लेटेंसी वाला नेटवर्क
  • बिजनेस ग्राहकों के लिए अधिक विश्वसनीय इंटरनेट
  • लाइव स्ट्रीमिंग के लिए विशेष नेटवर्क सेवा

दुनिया के दूसरे देशों में क्या हो रहा है?

यूरोप में भी दूरसंचार नियामकों ने 5G Network Slicing को Open Internet नियमों के साथ संगत माना है। वहां प्रत्येक मामले का अलग-अलग मूल्यांकन किया जा रहा है, बजाय इसके कि इस तकनीक पर पूरी तरह रोक लगा दी जाए।

निष्कर्ष

सरकार द्वारा Net Neutrality नियमों की समीक्षा शुरू करना भारत के डिजिटल भविष्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि नए नियम लागू होते हैं, तो टेलीकॉम कंपनियों के लिए नई कमाई के अवसर खुल सकते हैं। वहीं उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाली 5G सेवाएं भी मिल सकती हैं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: 5G Network Slicing क्या है?
यह ऐसी तकनीक है जिसमें एक ही 5G नेटवर्क को कई वर्चुअल नेटवर्क में बांटकर अलग-अलग सेवाओं को उनकी जरूरत के अनुसार नेटवर्क उपलब्ध कराया जाता है।

Q2: Net Neutrality का मतलब क्या है?
इसका मतलब है कि इंटरनेट पर सभी वेबसाइट, ऐप और ऑनलाइन सेवाओं के साथ समान व्यवहार किया जाए और किसी को विशेष प्राथमिकता न दी जाए।

Q3: सरकार नियम क्यों बदलना चाहती है?
2018 के नियम 5G Standalone तकनीक आने से पहले बनाए गए थे। अब नई तकनीकों के अनुसार उन्हें अपडेट करने की जरूरत महसूस की जा रही है।

Q4: क्या इससे आम यूजर्स के इंटरनेट पर असर पड़ेगा?
फिलहाल कोई बदलाव लागू नहीं हुआ है। अंतिम फैसला TRAI की सिफारिशों और सरकार की नई नीति पर निर्भर करेगा।

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